जीवन के छोटे सुख

​प्रस्तावना: यह मेरे इस ब्लॉग पर प्रकाशित पहली हिन्दी रचना है। मैँ आशा करता हूँ कि आप सबको यह छोटी-सी कहानी अच्छी लगेगी। व्याकरण में त्रुटियों के लिये मैँ क्षमाप्रार्थी हूँ । राजन शर्मा की दिनचर्या अत्यंत सामान्य थी। प्रतिदिन वे अपने घासबगान स्थित घर से नौ बजे निकलते और मौलाली स्थित अपने दफ्तर पहुँचते। … Continue reading जीवन के छोटे सुख

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There’s No Place Like Home?

​Author's note: Following is an extremely short slice-of-life story. Comments and criticism wil be appreciated 🙂 I was an ardent believer of the adage "There is no place like home." After a tiring day's work as a banker, I eagerly boarded the first government-run bus I saw — whether jam-packed or not — and returned … Continue reading There’s No Place Like Home?