डर लगता है

​गलियों को भगवा रंग के ध्वजों से सजा देख मुझे डर लगता है। गाड़ियों व मोटरसाइकिलों पर हरे झण्डों को देख मुझे डर लगता है।  कुर्ता-पैजामा पहने युवाओं को देख मुझे डर लगता है। वर्ष भर होते माता-रानी के जगराते के आयोजनकर्ताओं को देख मुझे डर लगता है। मुहल्ले में नये-नये मन्दिरों व मस्जिदों को … Continue reading डर लगता है

Late Spring

​“Will you marry me?” asked he. “Yes!” she replied. A blissful grin was writ large across his face. A grin which was being mirrored in the face of the lady before him. They continued to relish the newfound excitement, holding each other’s hands when suddenly the lady noticed something. “Are you crying?” The gentleman felt … Continue reading Late Spring

जीवन के छोटे सुख

​प्रस्तावना: यह मेरे इस ब्लॉग पर प्रकाशित पहली हिन्दी रचना है। मैँ आशा करता हूँ कि आप सबको यह छोटी-सी कहानी अच्छी लगेगी। व्याकरण में त्रुटियों के लिये मैँ क्षमाप्रार्थी हूँ । राजन शर्मा की दिनचर्या अत्यंत सामान्य थी। प्रतिदिन वे अपने घासबगान स्थित घर से नौ बजे निकलते और मौलाली स्थित अपने दफ्तर पहुँचते। … Continue reading जीवन के छोटे सुख