आलसी हैं हम

आलसी हैं हम, जो  किसी को जानने का प्रयास भी नहीं करते । पूर्वजों की पट्टी पढ़, एक तोते की भाँति जी रहे हैं । "वह लड़की बहुत मिलनसार है, चरित्रहीन होगी, दूर रह उससे ।" "अपने माँसाहारी दोस्तों से दूरी बना के रखो कहीं तुम्हारा धर्म भ्रष्ट न कर दें ।" "क्या उपनाम है … Continue reading आलसी हैं हम

वर्षा की अपेक्षा

गर्मी से तप रहा है शरीर पसीने से अशान्त हो रहा है मन। पङ्खे से भी मानो आ रही है गरम हवा स्नान मानो स्वयं को पसीने में पुनः भिगोने के समान। तभी अचानक गरम हवा के थपेड़े समाप्त हुए और गगन ने छाई रङ्ग में स्वयं को ढाल लिया। हताश मन ने कहा, "अपेक्षाएँ … Continue reading वर्षा की अपेक्षा

डर लगता है

​गलियों को भगवा रंग के ध्वजों से सजा देख मुझे डर लगता है। गाड़ियों व मोटरसाइकिलों पर हरे झण्डों को देख मुझे डर लगता है।  कुर्ता-पैजामा पहने युवाओं को देख मुझे डर लगता है। वर्ष भर होते माता-रानी के जगराते के आयोजनकर्ताओं को देख मुझे डर लगता है। मुहल्ले में नये-नये मन्दिरों व मस्जिदों को … Continue reading डर लगता है