वर्षा की अपेक्षा

गर्मी से तप रहा है शरीर पसीने से अशान्त हो रहा है मन। पङ्खे से भी मानो आ रही है गरम हवा स्नान मानो स्वयं को पसीने में पुनः भिगोने के समान। तभी अचानक गरम हवा के थपेड़े समाप्त हुए और गगन ने छाई रङ्ग में स्वयं को ढाल लिया। हताश मन ने कहा, "अपेक्षाएँ … Continue reading वर्षा की अपेक्षा

Advertisements

डर लगता है

​गलियों को भगवा रंग के ध्वजों से सजा देख मुझे डर लगता है। गाड़ियों व मोटरसाइकिलों पर हरे झण्डों को देख मुझे डर लगता है।  कुर्ता-पैजामा पहने युवाओं को देख मुझे डर लगता है। वर्ष भर होते माता-रानी के जगराते के आयोजनकर्ताओं को देख मुझे डर लगता है। मुहल्ले में नये-नये मन्दिरों व मस्जिदों को … Continue reading डर लगता है

जीवन के छोटे सुख

​प्रस्तावना: यह मेरे इस ब्लॉग पर प्रकाशित पहली हिन्दी रचना है। मैँ आशा करता हूँ कि आप सबको यह छोटी-सी कहानी अच्छी लगेगी। व्याकरण में त्रुटियों के लिये मैँ क्षमाप्रार्थी हूँ । राजन शर्मा की दिनचर्या अत्यंत सामान्य थी। प्रतिदिन वे अपने घासबगान स्थित घर से नौ बजे निकलते और मौलाली स्थित अपने दफ्तर पहुँचते। … Continue reading जीवन के छोटे सुख