डर लगता है

​गलियों को भगवा रंग के ध्वजों से सजा देख मुझे डर लगता है। गाड़ियों व मोटरसाइकिलों पर हरे झण्डों को देख मुझे डर लगता है।  कुर्ता-पैजामा पहने युवाओं को देख मुझे डर लगता है। वर्ष भर होते माता-रानी के जगराते के आयोजनकर्ताओं को देख मुझे डर लगता है। मुहल्ले में नये-नये मन्दिरों व मस्जिदों को … Continue reading डर लगता है

जीवन के छोटे सुख

​प्रस्तावना: यह मेरे इस ब्लॉग पर प्रकाशित पहली हिन्दी रचना है। मैँ आशा करता हूँ कि आप सबको यह छोटी-सी कहानी अच्छी लगेगी। व्याकरण में त्रुटियों के लिये मैँ क्षमाप्रार्थी हूँ । राजन शर्मा की दिनचर्या अत्यंत सामान्य थी। प्रतिदिन वे अपने घासबगान स्थित घर से नौ बजे निकलते और मौलाली स्थित अपने दफ्तर पहुँचते। … Continue reading जीवन के छोटे सुख