Urban Pilgrimage

Author's note: If you've ever spent autumn in Kolkata/Calcutta, you will be aware of the mass festivities of Durga Puja or to be more proper the Sharad navaratri. It is a magical experience, for the religious or otherwise and certainly for the one who is hardy enough to walk long distances! The following is based … Continue reading Urban Pilgrimage

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घर तक का सफ़र

घर की ओर चलते हुए अपनी मञ्ज़िल की सोचता हूँ, मानों प्रतिदिन सूरज मेरी कम उपलब्धियों को देख हताशा से डूब जाता है।   बत्तियों के पीले प्रकाश में चलते हुए अपने साथियों पर नज़र पड़ती है जो निरन्तर होड़ में लगे हुए हैं घर की ओर या काम की ओर, मुझे ज्ञात नहीं कुछ … Continue reading घर तक का सफ़र

दुःख के पश्चात

एक क्रूर अभिषाप है यह, सुखों के सागर में दुःख का मोती बीन लेना जब इन्द्रधनुष भी काला दिखे, हँसी में उपहास, मुस्कुराहट में अभिमान और सान्तवनाओं में छल प्रतीत हो।   दुःख का बवण्डर रङ्गों को भी उड़ा ले जाता है; खुशी के गीत, मैयत के स्वर बन जाते हैं, मीठी यादें तेज़ाब।   … Continue reading दुःख के पश्चात

एक सुन्दर सन्सार

प्रस्तावना: यह मेरी अन्ग्रेज़ी में लिखी कविता का एक अनुवाद है। आशा है पाठकों को पसन्द आएगा। हे कल्पनाओं के वासी! अपनी दुनिया निराली में ले चलो मुझे।   जहाँ असीम सौंदर्य रहता सदा हर मौसम का जादू प्रतीत होता। जहाँ का सवेरा ऊर्जा भरता और सितारों की नदियों से अंधेरा सजता।   ले चलो … Continue reading एक सुन्दर सन्सार